patient zero kya hai

पेशंट ज़ीरो या Index case क्या है? कोरोना का पहला मरीज कौन है

कोरोना का पेशंट जीरो मरीच, बच गई जान
जैसा हम सब अक्सर ग्राउंड जीरो के बारे सुनते रहते है और जब कोई बड़ी घटना या दुर्घटना होती है तो ये ग्राउंड जीरो शब्द और ज़ोर पकड़ लेती है। ये ग्राउंड जीरो शब्द अक्सर हमें T.V पत्रकारों के मुंह से सुनने को मिलता है। इस शब्द को बार - बार सुनकर आपके मन में जरूर सवाल उठा होगा ये ग्राउंड जीरो क्या होता है।

जैसा कि  हम देखते है ये दो शब्दों से मिलकर बना है और ये शब्द इतना साधारण है कि इसका अर्थ हर कोई जानता है। ग्राउंड का अर्थ है स्थान और जीरो का अर्थ शून्य। लेकिन यहाँ शून्य का अर्थ थोड़ा बदल जाता है।यहाँ शून्य का अर्थ है घटना का शुरुआत या घटना का वो स्थान जहां से कोई पत्रकार रिपोर्टिंग करता है। 

पेशंट जीरो या Index case क्या है 

 अब सवाल उठता है पेशंट जीरो या index case क्या है।जब से कोरोना महामारी ने दुनिया में कोहराम मचाया तब से ये प्रश्न और ज़ोर पकड़ लिया। पेशंट जीरो का अर्थ है वो पहला व्यक्ति जिसमें कोई नई महामारी पनपा। इसी को मेडिकल साइंस कि भाषा में इंडेक्स केस भी कहते है। जैसे-जैसे कोरोना का कहर बढ़ता जा रहा है पेशंट जीरो की चर्चा ज़ोर पकर रही है। इसका दो कारण है, पहला तो ये की अगर पेशंट जीरो की तलाश हो जाती है तो साइंटिस्ट को इस बिमारी से लड़ने में सहायता होती है। दूसरी दूसरा राजनीति से प्रेरित होता है। ये महामारी अपने आप पनपा है या किसी राजनीति के तहत किसी देश की सरकार ने इसे अपने लैब से पैदा किया है। 

क्या वेयी गुइजियान है कोरोना का पेशंट जीरो  

अभी तक का जो हिसाब किताब है, वो ये है कि कोरोना महामारी चीन के वुहान शहर के मछली बाजार से फैला। चीन के "द पेपर" नाम के न्यूज़ वैबसाइट की माने तो वेयी गुइजिहान नाम की महिला जो वुहान के मछली बाजार मे जिंगा बेच रही थी 10 दिशंबर को पहली बार बीमार पड़ी। शुरुआत मे डॉक्टर भी इस बीमारी को समझ नहीं पाये, परिणाम हुआ पहले तो इस महिला से इसके परिवार के सदस्यों मे ये बीमारी फैला फिर आसपास के लोगों मे। जब तक डॉक्टर या प्रशासन इस बीमारी को समझ पाते देर हो चुकी थी। 

राजनीतिक विचार अलग क्यों 

ये चाहे प्राकृतिक आपदा हो या मानव निर्मित कोई भी देश की सरकार नहीं चाहती की उसके ऊपर ये इल्जाम साबित हो कि उसके यहाँ से ये महामारी पनपा है। यही कारण है कि वर्चश्व की लड़ाई लड़ने वाले दो शक्तिशाली देश आपस मे एक दूसरे पर कोरोना virus को फैलाने का आरोप लगा रहे है। सत्य जो भी हो ये महामारी पूरे मानव जाती के लिए खतरा है। अगर ये कोरोना महामारी प्राकृतिक है तो समझ ले, जैसे हमने अपने सुख सुविधा के लिए प्रकृति को नींबू की तरह निचोड़ा है, प्रकृति उसका बदला ले रही है। अगर ये किसी देश द्वारा निर्मित है तो हम वर्चस्व पाने के नशे में घोर संकट की तरफ बढ़ रहे है। 

कलंक के समान है पेशंट जीरो की उपाधि 

एड्स का पेशंट जीरो
ये जरूरी नहीं की किसी रिसर्च के आधार पर अगर किसी को एकबार पेशंट जीरो मान ले तो वो वाकई मे पेशंट जीरो हो। एकबार अगर ये कलंक लग जाता है फिर रिसर्च गलत साबित होने के बाद भी दाग जल्दी नहीं धुलते, क्योंकि वक्त बहुत आगे निकाल चुका होता है। इसका दुनियाँ मे सबसे अच्छा उदाहरण है एड्स का घोषित पेशंट जीरो मरिच डुगस। 

वैसे तो एड्स का पहला मरीच एक शिकारी को माना जाता है, जिसे 1908 मे केमरून के जंगल मे शिकार के दौरान एक चिमपेंजी ने खरोचा था, जिसके कारण उसमे एड्स का वाइरस आया। 

बहुत दिनो तक ये theory चलती रही। 1980 मे गेटेन डुगास नाम के व्यक्ति में यह वाइरस पाया गया। पेशे से यह व्यक्ति फ्लाइट अटेडेंट था और संलांगीक था। अपनी बीमारी के बारे में पता होने के बावजूद इसने कई लोगों से संबंध बनाए और जानबूझकर लोगों मे बीमारी बाटता रहा। पूरी दुनियाँ ने इसे पेशंट जीरो माना। ये एक चलता- फ़िरता मानव बम था 

उसके मृत्यु के लगभग 30 साल बाद नए रिसर्च से साबित हुआ की गेटेन डुगास को भी ये बीमारी किसी और से लगा। पेशंट जीरो का कलंक तो उसके सर से उतार गया लेकिन बहुत देर हो चुका था। 


निष्कर्ष 
अभी हम जिस कोरोना माहामारी के प्रकोप से जूझ रहे है, उससे निबटने के लिए तह तक जाना जरूरी है लेकिन किसी व्यक्ति को पेशंट जीरो मान लेना जल्दबाज़ी होगी।  



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